गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

प्रकृति का उद्दाम सौंदर्य

चित्रकोट जलप्रपात
जगदलपुर ( बस्तर, छत्तीसगढ़ ) से ४० किमी दूर इन्द्रावती नदी पर
दिनांक ३०//०९


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गुरुवार, 19 नवंबर 2009

"यारों ने कितनी दूर बसाई है बस्तियाँ "

किसी शायर की ये पंक्तियाँ आज याद आ रहीं हैं "यारों ने कितनी दूर बसाई है बस्तियाँ " । दूरी समय के अंतराल की , व्यस्तता के कारण या शहरों के बीच की हो सकती है । दोस्तों के साथ २४ घंटे का समय बिताने में लगभग २० वर्ष का अंतराल हो गया । १९८८ में हास्टल से निकलने के बाद २००९ मे लगभग डेढ़ दिनों की छुट्टी में संजय ,योगेश जगदलपुर आये थे । साथ मे सोनू और अशोक थे ,जो मेरे लिये नये थे। साथ मे वीजी भाई भी थे जो यहीं से थे । दो दिनों तक खूब धमाचौकड़ी मची ।

तीरथगढ़ प्रपात ,कुटुमसर गुफ़ा तथा चित्रकोट जल प्रपात गये ।इन स्थानों पर मैं अनेकों बार जा चुका हूँ ,लेकिन इस बार का आनंद कुछ अलग था ।प्रकृति मुझे भी लुभाती है पर मै इसके लालच मे नहीं आता , गुफ़ा के अंदर जाना , फ़ाल में नीचे उतरना ,इन चीजों से बचते हुए मै प्रकृति को कुछ दूर से ही नमस्कार कर लेता हूँ ।लेकिन इस बार गुफ़ा के अंदर भी गया , फ़ाल में नीचे भी उतरा । २० साल का अंतराल कब मिट गया पता ही नही चला ।होटल के कमरों मे गपबाजी भी किसी दर्शनीय स्थल में जाने से ज्यादा मजेदार थी । अशोक के क्लासिक जोक्स का भी जिक्र जरू री है जो हमलोगों को हसीं से लोटपोट कर देता था । वीजी भाई के गानों का भी आनंद लिया गया ।

संजय और योगेश के फिजिक में ज्यादा परिवर्तन नहीं दिखा ,दोनों लगभग वैसे ही हैं जैसे कालेज के दिनों मे थे , जबकि मुझे इन २० सालों में लगभग ३० किलो अतिरिक्त वजन की प्राप्ति हुई है , तथा "दी ला आफ़ सेवन " के सिद्धांत के अनुसार उसी अनुपात में बालों की संख्या मे कमी आई है । विद्वानों ने कितना सटीक सिद्धांत दिया है कि जिस अनुपात में वजन बढ़ते जायेगा ,उसी अनुपात में बाल कम होते जायेंगे । इस नियम के उदाहरण आपको अपने आसपास दिख जायेंगे जो इस नियम को सत्य सिद्ध करते हैं । इस संदर्भ मे मै एक नया नियम जोड़ना चाहता हूँ कि पेट के बढ़ने का अनुपात उसको कम करने की कोशिश के अनुपात के बराबर होता है। यानी जिस गति से आप पेट की परिधि को कम करने का प्रयास करेगे उसी गति से वह वृद्धि को प्राप्त होगा । इस नियम का प्रतिपादन किया जाना शेष है ,रिसर्च स्कालरों से मेरा अनुरोध है कि इस दिशा में प्रयास करें ।इसमे समाज का महती हित निहित है । इस नियम के प्रतिपादन के पश्चात लोग जिम आदि मे अपना समय और पैसा नही गंवायेंगे ।जिससे समाज को काफ़ी लाभ होगा जिसकी गणना अर्थशास्त्री लोग कर सकते हैं ।



तीरथगढ़
जलप्रपात


















कुटुमसर गुफ़ा
( यह तो आप समझ ही गये होंगे कि वह व्यक्ति जिसे फ़ोटो फ़्रेम भी छोटा पड़ रहा है ,वह मैं हूँ । )

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रविवार, 9 अगस्त 2009

ब्लागिंग क्यों ?


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काफी समय से ब्लागों के चक्कर लगाने के बाद ब्लाग बनाने की सूझी। एक ब्लाग बनाया ,पर निर्णय नहीं कर पाया कि क्या डालूँ ,कुछ गम्भीर और उपदेश टाइप की बातें या कुछ हल्की-फ़ुल्की चर्चा या कुछ कवितायें वगैरह।फिर सोचा कि ब्लागिंग क्यों?मेरे ब्लाग के बिना हिन्दी ब्लागिंग का भविष्य अंधकारमय है या मानव जाति के हित मे मेरा ब्लाग लिखना आवश्यक है ,ऐसा कोई रिक्वेस्ट भी अभी तक नहीं मिला है ।अन्तत: समझ मे आया कि ये पहचान की खोज है तथा छपास नामक गम्भीर रोग के लिये आसानी से उपलब्ध औषधि है।इससे ब्लागर को संतुष्टि मिलती है कि समाज के हित हेतु मैने अपना अनमोल विचार प्रस्तुत कर दिया है,अब समाज को चाहिए कि इससे फ़ायदा उठाकर अपना उत्थान करे।अब नासमझ लोग इसका फ़ायदा ना उठा पायें इस में ब्लागर की क्या गलती। समाज के प्रति अपने इस महती कर्तव्य को पूर्ण करने के पश्चात ब्लागर को एक अनिर्वचनीय सुख की प्राप्ति होती है जिसे लगभग ब्रह्मानन्द के आसपास रखा जा सकता है।इसी सुख से प्रेरित होकर ही मैनें इस ब्लाग का शीर्षक "स्वांत: सुखाय " रखा है।अब लोग इसे पढ़कर सुख का अनुभव करें या न करें ,मैनें तो ब्लागिंग चालू कर दी है भईया।